बादशाह की बीवियां-Badshah Ki Biwiyan

बादशाह की बीवियां-Badshah Ki Biwiyan

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बादशाह की बीवियां-Badshah Ki Biwiyan

सुबकतगीन बादशाह अपनी एक बीवी से बहुत ज्यादा मुहब्बत करता था। एक बार दूसरी बीवियों ने उससे कहा कि आप अपनी बीवी फलां से ज्यादा मुहब्बत रखते हैं हालांकि हुस्न में हम उससे ज्यादा खूबसूरत हैं, समझदारी में भी हम उससे ज्यादा हैं। आख़िर उसमें कौन सी ऐसी खास बात है, हमें तो उसके अंदर कुछ नज़र नहीं आता मगर आप की मुहब्बत की निगाह जो उस पर उठती है

वह किसी दूसरी बीवी पर नहीं उठती, आखिर क्या वजह है? बादशाह ने कहा अच्छा मैं कभी इस बात का जवाब दे दूँगा। उसके बाद उसकी बीवियाँ यह बात भूल गई। एक दिन सुबकतगीन ने अपने घर के सहन में बैठकर कहा कि आज मैं अच्छे मूड में हूँ, इसलिए मैं चाहता हूँ कि मैं तुम में से हर एक को अच्छे अच्छे ईनाम से नवाजूँ। वे यह बात सुनकर बीवियां खुश हुई कि आज हमें शाही खज़ाने से ईनाम मिलेगा।

सहन में सोने चाँदी और जवाहरात के ढेर लगा दिए गए। बादशाह ने सबको बुलाकर कहा कि इस सहन में जो चीजें पड़ी हुई हैं उनमें से जिस चीज़ पर जो बीवी भी हाथ रख लेगी उसको वह चीज़ ईनाम के तौर पर दे दी जाएगी। चुनाँचे जिस वक्त मैं इशारा करू तुम दौड़कर अपनी पसंद की चीज़ पर हाथ रख लेना। बीवियाँ तैयार हो गयीं और उन्होंने अपनी-अपनी पसंद की चीज़ों पर निगाह जमा लीं।

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किसी ने याकूत के ऊपर, किसी ने हीरें के ऊपर, किसी ने सोने के ऊपर, किसी ने चाँदी के ऊपर। बादशाह ने इशारा किया तो बीवियों ने दौड़कर अपनी अपनी पसंदीदा चीज़ों पर हाथ रख लिए लेकिन वह बीवी जिस पर उसकी मुहब्बत की खास नजर रहती थी वह अपनी जगह खड़ी रही। जब सबने देखा कि हमने कीमती चीज़ों पर हाथ रख लिए मगर इसने किसी चीज़ पर हाथ नहीं रखा तो वे हँसने लगीं और बादशाह से कहने लगी

बादशाह! सलामत हम कहा करती थीं कि यह बेवकुफ है और इसके अंदर अक्ल की कमी है और आज इसकी अक्ल की कमी खुलकर सामने आ गई। यह तो बस सोचती रही लिहाज़ा आज इसके पल्ले कुछ नहीं आएगा। बादशाह ने उससे पूछा कि ऐ अल्लाह की बंदी! तूने किसी चीज़ पर हाथ क्यों नहीं रखा। वह कहने लगी बादशाह सलामत! मैं पूछना चाहती हूँ कि आपने यही कहा है ना कि आज जो जिस चीज पर हाथ रखेगी वह चीज़ उसकी हो जाएगी।

बादशाह ने कहा हाँ यही तो मैंने कहा है। उसने यह सुना तो आगे बढ़ी और बादशाह के कंधे पर हाथ रख दिया और कहने लगी बादशाह सलामत! जब आप मेरे हो गए तो सारा खज़ाना मेरा बन गया। बादशाह ने उसकी यह बात सुनकर अपनी दूसरी बीवियों से कहा कि देखो इस की अक्लमंदी और मुहब्बत की वजह से मैं इसके साथ ज्यादा मुहब्बत करता हूँ।
इसी तरह जब इंसान मुहब्बते इलाही को थाम लेता है तो काएनात की हर चीजें उसके लिए मुसख्खर (काबू में) हो जाती हैं।

इश्क की दीवानगी तय कर गई कितने मकाम
अक्ल जिस मंज़िल पे थी अब तक उसी मंज़िल पे है

नोट :- एक आखरी बात और अर्ज करता चलूँ की अगर
कोई पोस्ट, क़ौल, वाक़िया, अच्छा लगा करे तो पढ़ने के
बाद उसे अपने दोस्तों रिश्ते दारों को भी भेज दिया कीजिये
ताकि दूसरे लोग भी उस से फायदा हासिल कर सकें।

दुआओं में याद रखना

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